एक नजर भारतीय क्रिकेट की उभरती प्रतिभाओं पर

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Syed Mushtaq Ali Trophy 2021: दुनिया भर के क्रिकेटर अब अपने देश के लिए खेलने के बजाय आईपीएल (IPL) में खेलने को तरजीह देने लगे हैं. इस कारण भारतीय खिलाड़ियों से मैदान और मैदान के बाहर कोई भी खिलाड़ी पंगा नहीं लेता है. इसीलिए क्रिकेट से संबंधित दुनिया भर के दादा लोग “भारत राग” अलापते दिखाई देते हैं.

Source: News18Hindi
Last updated on: January 31, 2021, 7:29 PM IST

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भारतीय क्रिकेट का घरेलू ताना बाना इतना सुदृढ़ बना हुआ है कि नई प्रतिभाएं लगातार उभर कर आती जा रही हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अगर अकूत पैसा कमा रहा है, तो मैदानों, स्टेडियमों, क्रिकेट प्रशिक्षण और मूलभूत ढांचे को विकसित करने में दिल खोल कर खर्च भी कर रहा है. अभी ऑस्ट्रेलिया जाकर भारतीय सीनियर टीम श्रृंखला जीतकर झंडे गाड़ ही चुकी है. अच्छा यह देखकर लगता है कि जिसे मौका मिल रहा है, वह उसे तुरंत भुना लेता है. निरस्त किए जाने व आलोचनाओं की परवाह किए बिना ऋषभ पंत, चेतेश्वर पुजारा, शुभमन गिल, सिराज, शार्दुल ठाकुर और वॉशिगटन सुंदर जैसे युवा खिलाड़ियों ने दिखा दिया कि नए भारत की नई जोशीली टीम न रुकने वाली है और न ही पिटने वाली है.

इधर, घरेलू क्रिकेट में सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी-20 क्रिकेट की कई प्रतिभाएं प्रकाश में आयीं. सभी जानते हैं कि आईपीएल की नीलामी भी खुलने वाली है और इसी वर्ष के अंत में टी-20 का विश्व कप भी भारत में होने वाला है. इन दोनों चीजों को देखते हुए मुश्ताक अली ट्रॉफी की प्रतियोगिता में उभरती नई प्रतिभाओं पर ध्यान देना मुनासिब होगा. आईपीएल ने तो भारतीय क्रिकेट के आर्थिक हालातों में क्रांति ला दी है. टी-20 के मारधाड़ वाले क्रिकेट में सैकड़ों क्रिकेटरों के वारे-न्यारे हो रहे हैं. आईपीएल में चुना खिलाड़ी करोड़ों में खेलने लगता है. इसलिए दुनिया भर के खिलाड़ी आईपीएल खेलने के लिए वैसे ही लालायित रहते हैं जैसे शहद पर मधुमक्खी!

मुश्ताक अली ट्रॉफी में उभरे बल्लेबाजों में प्रमुख हैं तमिलनाडु के नारायण जगदीशन. फाइनल के पहले तक सात मैचों में उन्होंने 87.5 के औसत से 350 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट था 142.27. इन सात मैचों में उन्होंने 28 चौके और 17 छक्के लगाए. प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में पंजाब के प्रभासिमरन, बड़ौदा के केदार देवधर, सौराष्ट्र के अवि बारोट, असम के रियान पराग, झारखंड के विराट सिंह, पुडुचेरी के शेल्डन जैक्सन, केरल के ओपनर बल्लेबाज मोहम्मद अजहरूद्दीन, मेघालय के पुनीत बिष्ट, मध्य प्रदेश के रजत पाटीदार और मुकेश साहनी का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. सौराष्ट्र के प्रेरक मांकड़ एक अत्यंत ही बहादुर और उपयोगी ऑलराउंडर के रूप में उभरकर सामने आए हैं.

टी-20 में नए उभरते गेंदबाजों में बिहार के आशुतोष अमन का नाम लेफ्ट ऑर्म स्पिनर के रूप में उभरा. उन्होंने क्वार्टर फाइनल खत्म होने तक सबसे ज्यादा विकेट लिए. मध्य प्रदेश के आवेश खान ने अपनी तेज गेंदबाजी से बहुत प्रभावित किया. उनका “हाई एक्शन” 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार, गेंद को दोनों ओर स्विंग कराने की कला ने टूर्नामेंट पर बड़ा प्रभाव छोड़ा. तेज गेंदबाजी में उभरते हुए गेंदबाज के रूप में चेतन सकारिया ने अपनी विविधता से बल्लेबाजों की बोलती बंद करके रख दी. वह सौराष्ट्र के उभरते हुए गेंदबाज हैं. आईपीएल में प्रवेश के वह कड़े दावेदार हैं.

पंजाब के सिद्धार्थ कौल तो तेज गेंदबाजी के पुराने चावल हैं. आईपीएल की कोई न कोई टीम उन्हें जरूर पकड़ लेगी. इसी तरह से बंगाल के ईशान पोरेल भी तेज गेंदबाजी से सभी को प्रभावित कर रहे हैं. आईपीएल ने भारतीय खिलाड़ियों की तकदीर खोल दी है. इसी के कारण भारतीय बल्लेबाजों में अद्भुत निडरता आ गई है. संक्षिप्त प्रारूप में डर की जगह कहां है? दूसरा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर के तेज गेंदबाजों के सामने यहां खेलने का अभ्यास हो जाता है. ज्यादा पैसे की चाह में विदेशी तेज गेंदबाज यहां के दिलतोड़क विकेट पर मेहनत करके पैसे तो बटोर लेते हैं, लेकिन अपनी उर्जा और ताकत नष्ट करते रहते हैं. ज्यादा बरसों तक खेलते रहकर पैसा बटोरने की चाह में वे तेज गेंदबाजी के प्रमुख अस्त्र “स्पीड” के बजाय लाइन और लेंग्थ वाले गेंदबाज बनकर रह जाते हैं. आपने भी देखा होगा कि दुनिया के सभी तेज गेंदबाज अब छोटे रन अप से ही गेंजबाजी करने लगे हैं. इससे भारतीय क्रिकेट के शीर्ष तक पहुंचने की राह आसान हो गई है.

यह भी अब तय हो गया है कि दुनिया भर के क्रिकेटर अब अपने देश के लिए खेलने के बजाय आईपीएल में खेलने को तरजीह देने लगे हैं. इस कारण भारतीय खिलाड़ियों से मैदान और मैदान के बाहर कोई भी खिलाड़ी पंगा नहीं लेता है. इसीलिए क्रिकेट से संबंधित दुनिया भर के दादा लोग “भारत राग” अलापते दिखाई देते हैं. वसीम अकरम और शोएब अख्तर भी पाकिस्तानी क्रिकेट की परवाह नहीं करते. वे भारतीय क्रिकेट पर ही टिप्पणियां करते रहते हैं और भारतीय खिलाड़ियों की प्रशंसा में रत रहते हैं. इसीलिए तो मैं कहता हूं कि आधुनिक युग में आदमी पैसे को नहीं, बल्कि पैसा आदमी को चला रहा है.

बहरहाल टी-20 की मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए हुई प्रतियोगिता में एक बात तो सामने आ गई है कि भारत की बेंच स्ट्रेथ अब पहले से ज्यादा मजबूत है. भारत विश्व क्रिकेट के सिंहासन पर लंबे समय तक बैठ सकता है.*लेखक पद्मश्री से सम्मानित जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर हैं.


ब्लॉगर के बारे में

सुशील दोषीकाॅमेंटेटर

लेखक प्रसिद्ध काॅमेंटेटर और पद्मश्री से सम्मानित हैं.

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First published: January 31, 2021, 4:15 PM IST

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