कांग्रेस में कलह: इतने जल्द शांत नहीं होंगे ‘बागी नेता’, भविष्य को लेकर तैयार हैं सभी की योजनाएं

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पल्लवी घोष
नई दिल्ली.
 बिहार चुनाव (Bihar Election ) के नतीजे सभी के सामने हैं. देश के इस खास चुनाव के परिणामों का इंतजार केवल बिहार ही नहीं, कांग्रेस का वह खेमा भी कर रहा था जो काफी समय से नेतृत्व से नाराज है. खास बात है कि इस खेमे में पार्टी के बड़े और दिग्गज नाम शामिल हैं. अब जब रिजल्ट आ गए हैं, तो सभी ‘असंतुष्ट’ नेता फिर से सक्रिए हो गए हैं. हालांकि, इस बार पत्र नहीं सीधे मीडिया से मुखातिब होने का फैसला किया गया है.

इस बार रणनीति अलग है. पार्टी के ये नेता एक-एक कर सामने आएंगे, ताकि चोट ज्यादा गहरी लगे. अब तक सबसे तेज प्रहार गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) का रहा. उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के अंदर जो भी हो रहा है वह 5 स्टार कल्चर की घुसपैठ की वजह से हो रहा है. अब आजाद, दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh), अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की राजनीति को बीजेपी (BJP) ने अपना लिया है. ये राजनेता पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समय गुजारते थे.

हमने कई ऐसे मामले देखे, जहां ये नेता अचानक फोन उठाते हैं और कार्यकर्ता के किसी काम को करने के लिए कहते हैं. भले ही काम पूरा न हो, लेकिन कार्यकर्ता खुश हो जाता है, क्योंकि कोशिश की गई थी. जबकि, यह चीज कांग्रेस के अंदर तेजी से कम होती जा रही है.बिहार में भी दिल्ली से आने वाले कई नेताओं ने 5 स्टार होटलों का रुख किया. उन्होंने पार्टी के उन उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से चर्चा तक नहीं की, जो दिल्ली से आने वाले पार्टी नेताओं की एक झलक पाने के लिए इंतजार कर रहे थे.

अब इन बागी नेताओं का आगे का क्या प्लान है. सभी ने अनौपचारिक तौर पर मुलाकातें की. यह तय हुआ कि कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) पहले बोलेंगे. हुआ भी ऐसा ही. दुबई से लौटने के बाद ही उन्होंने चुप्पी तोड़ी. यह तय था कि सिब्बल के बाद आजाद बोलेंगे. सूत्रों का कहना है कि यह प्लान अगले कुछ दिन जारी रहेगा और अभी कई नेता सामने आकर अपनी बात कहेंगे.

कई नेताओं ने फैसला कर लिया है कि वे वापस नहीं जाएंगे. अपने आगे के समय के लिए उन्हें कांग्रेस की जरूरत नहीं है. कुछ ने दूसरे करियर चुनने का फैसला किया, तो कुछ ने धीरे से रिटायर होने की योजना बनाई है. हालांकि, कुछ का मानना है कि वे पार्टी से आगे जाकर खुद को साबित कर सकते हैं.

सूत्र यह भी बताते हैं कि एक और मीटिंग होने की संभावना है. कुछ नेता योजना बना रहे हैं कि जब भी चुनाव हो एक व्यक्ति को पार्टी प्रमुख के लिए चुनाव लड़ना चाहिए. लेकिन अगर राहुल गांधी उम्मीदवार हैं, तो वे खड़े नहीं हो सकते. गहलोत फिलहाल चुप हैं. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने तय किया है कि वे चुप रहेंगे और बागियों को नजरअंदाज करेंगे. जबकि, यह साफ है कि ये बागी नेता लंबे समय तक चुप बैठने के मूड में नहीं हैं.

आजाद और आनंद शर्मा जैसे कुछ नेताओं को सोनिया गांधी गठित नई कमेटी में शामिल किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि कांग्रेस अपना पक्ष रख सके. हालांकि, सभी बागी नेता लड़ाई के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें इस बात का भी ध्यान है कि गांधियों तक अभी नहीं पहुंचना है.

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