दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर पीएम मोदी बोले- एकात्म मानव दर्शन आज भी प्रासंगिक– News18 Hindi

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नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP), पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Deen Dayal Upadhyay) की स्मृति में गुरुवार को समर्पण दिवस मना रही है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भाजपा के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. पीएम ने कहा कि आज हम सभी दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर अनेक चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्र हुए हैं. पहले भी अनेकों अवसर पर हमें दीनदयाल से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का, विचार रखने का और अपने वरिष्ठजनों के विचार सुनने का अवसर मिलता रहा है. पीएम ने कहा कि आप सबने दीनदयाल को पढ़ा भी है और उन्हीं के आदर्शों से अपने जीवन को गढ़ा भी है. इसलिए आप सब उनके विचारों से और उनके समर्पण से भलीभांति परिचित हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा अनुभव है और आपने भी महसूस किया होगा कि हम जैसे जैसे दीनदयाल के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है.

उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन का उनका विचार मानव मात्र के लिए था. इसलिए, जहां भी मानवता की सेवा का प्रश्न होगा, मानवता के कल्याण की बात होगी, दीनदयाल का एकात्म मानव दर्शन प्रासंगिक रहेगा. सामाजिक जीवन में एक नेता को कैसा होना चाहिए, भारत के लोकतन्त्र और मूल्यों को कैसे जीना चाहिए, दीनदयाल इसके भी बहुत बड़ा उदाहरण हैं.

कोरोनाकाल में देश ने अंत्योदय की भावना को सामने रखा- PM
पीएम ने कहा कि एक ओर वो भारतीय राजनीति में एक नए विचार को लेकर आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर, वो हर एक पार्टी, हर एक विचारधारा के नेताओं के साथ भी उतने ही सहज रहते थे.हर किसी से उनके आत्मीय संबंध थे. मारे शास्त्रों में कहा गया है- ‘स्वदेशो भुवनम् त्रयम्’ अर्थात, अपना देश ही हमारे लिए सब कुछ है, तीनों लोकों के बराबर है. जब हमारा देश समर्थ होगा, तभी तो हम दुनिया की सेवा कर पाएंगे. एकात्म मानव दर्शन को सार्थक कर पाएंगे.

उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भी यही कहते थे. उन्होंने लिखा था- ‘एक सबल राष्ट्र ही विश्व को योगदान दे सकता है.’ यही संकल्प आज आत्मनिर्भर भारत की मूल अवधारणा है. इसी आदर्श को लेकर ही देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.

पीएम ने कहा एकात्म मानव दर्शन के विशेषरूप -व्यष्टि से समष्टी की यात्रा व्यक्त होती है. स्वार्थ से परमार्थ की यात्रा स्पष्ट होता है. मैं नहीं, तू ही का संकल्प भी सिद्ध होता है. कोरोनाकाल में देश ने अंत्योदय की भावना को सामने रखा, और अंतिम पायदान पर खड़े हर गरीब की चिंता की. आत्मनिर्भरता की शक्ति से देश ने एकात्म मानव दर्शन को भी सिद्ध किया, पूरी दुनिया को दवाएं पहुंचाईं, और आज वैक्सीन पहुंचा रहा है. लोकल इकॉनमी पर विजन इस बात का प्रमाण है कि उस दौर में भी उनकी सोच कितनी व्यावहारिक और व्यापक थी. आज ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र से देश इसी विजन को साकार कर रहा है.

हमारी राजनीति में भी राष्ट्र नीति सर्वोपरि- PM

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज आत्मनिर्भर भारत अभियान देश के गांव-गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के भविष्य निर्माण का माध्यम बन रहा है. प्रकृति के साथ सामंजस्य का दर्शन दीनदयाल जी ने हमें दिया था. भारत आज इंटरनेशनल सोलर अलायन्स का नेतृत्व करके दुनिया को वही राह दिखा रहा है. अंतिम पायदान पर भी खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर कैसे सुधरे, ईज ऑफ लिविंग कैसे बढ़े इसके प्रयास आज सिद्ध होते दिख रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना, जनधन खाते, किसान सम्मान निधि, हर घर में शौचालय, हर गरीब को मकान, आज देश एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए गौरव के साथ विकास के मार्ग पर चल पड़ा है. इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिशा में हो रहा बड़ा बदलाव भी सामान्य मानवी के जीवन को सरल बनाएगा, देश को एक नई और भव्य पहचान देगा. आज जब देश में इतने सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं, पूरी दुनिया में भारत का कद बढ़ रहा है, तो कौन भारतीय होगा जिसका सीना चौड़ा न होता होगा.

पीएम ने कहा कि आज विश्व भर में फैला हुआ भारतीय समुदाय जिस गर्व के साथ जी रहा है उसका कारण भारत में हो रही गतिविधि है. हमें गर्व होता है कि हम अपने महापुरुषों के सपनों को पूरा कर रहे हैं. हमें गर्व है कि हमारी विचारधारा देशभक्ति को ही अपना सब कुछ मानती है. हमारी विचारधारा राष्ट्र प्रथम की बात करती है. ये हमारी विचार धारा है कि हमें राजनीति का पाठ, राष्ट्र नीति की भाषा में पढ़ाया जाता है. हमारी राजनीति में भी राष्ट्र नीति सर्वोपरि है.

राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य- PM

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हमें राजनीति और राष्ट्रनीति में एक को स्वीकार करना होगा, तो हमें संस्कार मिले हैं हम राष्ट्रनीति को स्वीकार करेंगे, राजनीति को नंबर दो पर रखेंगे. देश में नए जनजाति कार्य मंत्रालय का गठन भाजपा की ही सरकार में हुआ है. ये भाजपा सरकार की ही देन है कि पिछड़ा आयोग को देश में संवैधानिक दर्जा मिल सका है. और ये भाजपा की सरकार है जिसने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को भी आरक्षण देने का काम किया है.

उन्होंने कहा कि देश में नए जनजाति कार्य मंत्रालय का गठन भाजपा की ही सरकार में हुआ है. ये भाजपा सरकार की ही देन है कि पिछड़ा आयोग को देश में संवैधानिक दर्जा मिल सका है. और ये भाजपा की सरकार है जिसने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को भी आरक्षण देने का काम किया है. राज्यों का विभाजन जैसा काम राजनीति में कितने रिस्क का काम समझा जाता था. इसके उदाहरण भी हैं अगर कोई नया राज्य बना तो देश में कैसे हालत बन जाते थे. लेकिन जब भाजपा की सरकारों ने 3 नए राज्य बनाए तो हर कोई हमारे तौर तरीकों में दीनदयाल जी के संस्कारों का प्रभाव स्पष्ट देख सकता है.

पीएम ने कहा कि हमारे राजनीतिक दल हो सकते हैं, हमारे विचार अलग हो सकते हैं, हम चुनाव में पूरी शक्ति से एक दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं पर इसका मतलब ये नहीं कि हम अपने राजनीतिक विरोधी का सम्मान ना करें. प्रणव मुखर्जी, तरुण गोगोई, एस.सी.जमीर इनमें से कोई भी राजनेता हमारी पार्टी या फिर गठबंधन का हिस्सा कभी नहीं रहे. लेकिन राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है.

राजनीतिक अस्पृश्यता का विचार हमारा संस्कार नहीं- प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक अस्पृश्यता का विचार हमारा संस्कार नहीं है. आज देश भी इस विचार को अस्वीकार कर चुका है. हमारी पार्टी में वंशवाद को नहीं कार्यकर्ता को महत्व दिया जाता है. हमारी पार्टी, हमारी सरकार आज महात्मा गांधी के उन सिद्धांतों पर चल रही है जो हमें प्रेम और करुणा के पाठ पढ़ाते हैं. हमने बापू की 150वीं जन्मजयंती भी मनाई और उनके आदर्शों को अपनी राजनीति में, अपने जीवन में भी उतारा है.

उन्होंने कहा कि ये हमारी ही सरकार है जिसने थी नेताजी को वो सम्मान दिया जिसके वो हकदार थे, उनसे जुड़ी हुई फाइल्स को खोला. सरदार पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा बनवाकर हमने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया. बाबा साहब अंबेडकर को भी भारत रत्न तब मिला जब भाजपा के समर्थन से सरकार बनी थी.

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