नन्हीं बेटी के दुष्कर्मी पिता को उम्र कैद की सजा, जज ने भावुक होकर फैसले में लिखी बेटियों पर कविता

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कोर्ट ने एक दुष्कर्मी पिता को उम्र कैद की सजा सुनाई है.

बारह 12 साल की बेटी से दुष्कर्म (Rape) करने के मामले में अदालत (Court) ने उसके पिता को उम्रकैद (life imprisonment) की सजा सुनाई है. इस मामले में आरोपी की पत्नी (Wife) ने ही पति के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर बेटी के साथ कई बार रेप करने का आरोप लगाया था. जज ने इसी मामले पर फैसला सुना दिया.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 7, 2021, 11:12 PM IST

आगरा. अपनी फूल सी नाबालिग बेटी के साथ रेप (Rape) किए जाने वाले शर्मनाक मामले में दुष्कर्मी बाप को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है. यह फैसला सुनाने के दौरान न्यायाधीश (Judge) भी बेटी को इंसाफ देते हुए भावुक भाव में नजर आए. सजा सुनाने के साथ ही अपने फैसले में न्यायाधीश ने बेटियों पर कविता (Poem) के रूप में लिखा कि, बेटी आंगन की चिड़िया है. दुष्कर्मी पिता (Father) को सजा के बाद इसकी चर्चा हो रही है. इस मामले में पत्नी ही वादी थी. जिसने अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए पति के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने से लेकर अदालत तक की लंबी लड़ाई लड़ी.

गौरतलब है कि आगरा के जगदीशपुर क्षेत्र में 10 जून 2015 को एक महिला ने अपने पति के खिलाफ एफआईआर लिखाई थी. महिला का आरोप था कि जब वह अपनी बहन के घर गयी थी तो 10 दिन तक उसकी 12 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया.

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यह दरिंदगी किसी और ने नहीं बल्कि बच्ची के बाप ने ही की. महिला जब अपनी बहन के घर से वापस अपने घर आई तो अपनी 12 साल की बेटी को गुमसुम देखा. मां ने कई बार पूछा, लेकिन बेटी खामोश रही. उसे उसके पिता ने धमकाया था. बहुत प्यार से मां ने जब अपनी बेटी से पूछा तो बेटी ने बताया कि उसके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया है और धमकी दी है कि किसी से या मां से बात बताई तो मां और उसे दोनों को मार डालेंगे.पत्नी ने दर्ज कराई थी एफआईआर
अपनी बेटी के साथ में इस दरिंदगी से महिला ने अपने पति को सजा दिलाने की ठान ली. इसके बाद महिला ने इस मामले की एफआईआर थाना जगदीशपुरा में दर्ज कराई गई. यह मामला पॉक्सो कोर्ट ने चला. इस मामले में फैसला देते हुए कोर्ट ने बलात्कारी पिता को उम्र कैद की सजा सुनाई. साथ ही 180000 का जुर्माना भी लगाया.

जज ने फैसले में लिखी ये बात
न्यायाधीश वीके जयसवाल ने लिखा की ऐसे व्यक्ति को समाज में रहने का अधिकार नहीं है जो रक्षक से भक्षक बन जाए. न्यायाधीश जायसवाल ने बेटियों पर एक कविता भी लिखी, – जब-जब जन्म लेती है बेटी खुशियां साथ लाती है बेटी, ईश्वर की सौगात है बेटी.. सुबह की पहली किरण है बेटी.. तारों की शीतल छाया है बेटी.. आंगन की चिडिय़ा है बेटी. बेटियों पर लिखी इस कविता ने सबका दिल छू लिया. न्यायाधीश वीके जायसवाल ने रक्षक की भूमिका से इतर भक्षक बनने वाले राक्षसों को अपने इस फैसले से बड़ा सबक सिखाया है.




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