वैक्सीन स्टॉक का बड़ा हिस्सा हासिल कर रही कंपनियां, IT कर्मियों को लगे सबसे ज्यादा टीके

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नई दिल्ली. सरकार ने दफ्तरों में कर्मचारियों की टीका लगाए जाने की अनुमति 7 अप्रैल को दे दी थी. इसका नतीजा यह हुआ है कि देश के कई बड़े शहरों से सामने आए टीकाकरण (Covid-19 Vaccination) के आंकड़ों में एक बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट कंपनियों के कर्मियों का है. हालांकि, इतने बड़े स्तर पर टीकाकरण के चलते एक बार फिर वैक्सीन को लेकर असमानताओं की बात सामने आ रही है. क्योंकि देश के कार्यबल का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम कर रहा है.

आंकड़ों में समझें स्थिति

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कि 7 अप्रैल से लेकर बीते बुधवार तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के कई शहरों में स्थित कैंपस में 69 हजार 170 शॉट दिए जा चुके हैं. बेंगलुरु के सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स ने अब तक 48 हजार 313 वैक्सीनेशन किए हैं. जबकि, इन्फोसिस के मामले में यह आंकड़ा 28 हजार 493 और मारूती सुजुकी में 22 हजार 472 पर है. दफ्तरों में टीका लगवाने वाली सूची में आईटी कंपनियां शीर्ष पर हैं.

मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई जैसे इकोनॉमिक हब्स में अब तक दफ्तरों में करीब 20.36 लाख टीकाकरण हुए हैं. यह देश के शीर्ष 7 मेट्रो शहरों के कुल वैक्सीनेशन के आंकड़ों से 12 फीसदी से भी ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे एक बात साफ होती है कि 21 जून से लागू होने जा रही नई वैक्सीन नीति के बाद भी निजी अस्पतालों को वैक्सीन का 25 फीसदी हिस्सा मिलता रहेगा. कॉर्पोरेट कंपनियां आमतौर पर इनसे टाई-अप करती हैं.यह भी पढ़ें: कोरोना वैक्‍सीन लगवाने में महिलाएं पीछे, 1000 पुरुषों में 854 ने ही लगवाया टीका

इस तरह जारी टीकाकरण कार्यक्रम से तीन बातें सामने निकलकर आती हैं-

पहला, डेटा दिखाता है कि दफ्तरों को लेकर जारी वैक्सीन पॉलिसी ने इन शीर्ष कंपनियों में वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया है. ये कंपनियां देश की जीडीपी में अहम योगदान करती हैं. हालांकि, अब इसी के चलते असंगठित क्षेत्रों और जोखिम वाले वर्ग के लिए भी इस तरह की नीति बनाने की जरूरत सामने आती है.

दूसरा, वैक्सीन की सप्लाई सीमित है और बड़ी कंपनियां मजबूत आर्थिक स्थिति के चलते आसानी से टीकाकरण का 25 फीसदी हिस्सा हासिल कर रही हैं. इसके बाद सरकार के नियंत्रण वाले टीकों के 75 प्रतिशत हिस्से से टीकाकरण के लिए खास वर्गों को लक्ष्य बनाकर व्यवस्था तैयार करनी होगी.

तीसरा, डेटा दिखाता है कि आबादी के एक वर्ग को अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं, बेहतर टीकाकरण की व्यवस्था मिल रही है. ऐसे में उस आबादी के लिए भी एक रणनीति की जरूरत होगी, जहां मेडिकल सुविधाएं अच्छी नहीं हैं. तीसरी लहर के मद्देनजर भी यह कदम अहम है.

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