हाथी रे! हाथी देखो सफेद हाथी

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खबरीलाल हाथी दरसन कर आनंदित होवत हे. हाथी ल परनाम करत हे. खबरीलाल बतइस के हम बचपन म हाथी उपर कविता सुना के परीक्षा पास करे हन. स्कूल म पहिली साक्षात् हाथी आ जाय. सूंड़ उठा के ‘वंदे मातरम’ मुद्रा म नमस्कार करे. पूरा स्कूल हाथी के दरसन करे. महावत ह लइका मन ल हाथी के पीठ उपर चढ़ाय-उतारे. एखर एवज म रूपिया-पइसा के जो मदद बने मास्टर अउ लइका मन महावत ल denदे दें. हाथी के चल-चलन रंग ढंग सब लइका मन के मनोरंजन होय. हाथी म विदया के देवता श्री गणेश के दर्शन हो जाय.

हाथी अइस, अतिथि देव भव

लइका मन हाथी ल चिढ़ायेंन  ‘नान ,नान आँखी सुपा-सुपा कान’ हाथी कभू खुश होय त कभू चिढ जाय. हाथी लइका मन संग स्कूल मैदान म फ़ुटबाल खेले. दउड़े अउ दउड़ाय. बड़ मजा आय. महावत हाथी ल बस्ती म घुमाय. हाथी पीपर के पत्ता ल बड़ चाव से खाय. स्कूल के छुट्टी होय त पूरा लइका मन बस्ती म ओखर संगे संग घूमें. अतिथि देव भव के भाव राहय. हाथी खुश, महावत खुश. लइका मन खुश. एखर से लइका मन के मन म जानवर उपर परेम उमड़े. हाथी पालना, घोड़ा पालना अब बहुत कठिन अउ हिम्मत के बात होगे हे.

हाथी बर रोज तीन सौ,चार सौ किलो खाना होना. पिए बर कम से कम डेढ़ सौ लीटर पानी होना. घोड़ा किलो-किलो चना खाथे, चना के भाव आसमान म हे. हार्स-पावर ल झेलना मुश्किल हे. अब घोड़ा पालना दुलत्ती खाना हे. गधा घलो भारी परथें. मनखे  जब ले जंगल ल खाना शुरू करिस हे तब ले जंगल कलप-कलप के रोवत हे. चीखत –चिल्लावत हे. हाथी छेल्ला खेत-खेत भटकत हे. नुकसानी करत हे. गरीब पिसावत हे. हाथी सहित सबे जानवर भड़कगे हे. हाथी के खोपड़ी गरमा गे हे. अब क्षमा कइसे कर? आँफिस के सफेद हाथी चारा चरत हें.

लूप लाईन:चुप लाईन

चोखेलाल किहिस-कभू-कभू मोला हाथी म घोड़ा दिखथे, घोड़ा म हाथी के भरम होथे. कभू हाथी भूरवा दिखथे त कभू सफेद. कई आँफिस म सफेद हाथी दिखथे. जों न  कउड़ी के राहंय न काम के . हाथी सफेद अउ भुरवा दुनो किसम के होथे. प्रशासन म सफेद हाथी किसम के अधिकारी के बहुत मान हे . भुरूवा किसम के हाथी कस अधिकारी प्रशासन-तंत्र के लूप लाइन म होथें. सफेद-अंग-वस्त्र वाले मन के सफेद हाथी किसम के अधिकारी मन संग खूब गुटरगूं होथे. मिल बाँट के चारा खाय म परेम छलकथे. हमर देश म सफेद हाथी कस अधिकारी आँफिस-आँफिस म मिल जथे.

सूंघे म चतुरा

हाथी मनखे ल सूंघे म चतुरा होथें. चारा-पानी के इंतजाम कहाँ-कहाँ हो सकत हे एला बने जानथें. ये बलवान होथे. इनकर सूंड म ताकत होथे. देश के बड़े-बड़े समस्या ल चाहें त  ओ कतको गरू होय उठा के हल कर सकत हें. ये गरू से गरू समस्या या संकट खड़े करे म पाछू नइ राहंय. सरकार मन के रंग ढंग ल दूरिहा ले भांप डरथें. आवक-जावक के दिशा गियान इन  ल झटकुन हो जथे. इनकर कान बने अउ खड़े होथे.समय से पहिली हर घटना के सुराग इन ल  मिल जथे. कुछ अपवाद ल छोड़ के सफेद हाथी किसम के अधिकारी मन के काम करे के गति तेज होथे. उन अपन बुद्धि के स्तेमाल करें तो बड़े-बड़े सफलता मिलथे. काम पियारा होय ले इन ईमानदारी से भिड़ीन तो रात-दिन एक कर देथें.

अगतिमान फाइल् के सदगति

कोढ़िया सफेद हाथी मन आँफिस के कार्य-गति ल जाम घलो कर देथें. डिजिटल जग म फ़ाइल घलो गतिमान होथे.फ़ाइल के ‘मान’ होय ले ओमा अपने आप गति आ जथे. तब मामूली से मामूली फ़ाइल् घलो गतिमान हो जथे.गतिमान फ़ाइल् के डिजिटलीकरन हो जथे. फेर दिल्ली सरकार घलो हद कर दिस  सफेद हाथी बरोबर अगतिमान अधिकारी मन ल घलो गतिमान कर  दे हे. कोढ़िया मन ल मूल्यांकन के झंडी देखा दे हे. सब ईश्वर के लीला हे के राजकाज म शेर, चीता, हाथी घोड़ा, गदहा, घुघवा, परेवा, जंगली कुकुर के गुन वाले गुनीजन खूब देश सेवा करत हें. अब घोडा के जगा गदहा के सवारी पा के लोग खुश हें.

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