Bhojpuri Spl: कैलिफोर्निया में तोड़ल गइल गांधीजी के मूर्ति, काई होई एह अपमान से हासिल?

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अमेरिका के कैलिफोर्निया (California, US) पार्क में लागल महात्मा गांधी के मूर्ति (Statue of Mahatma Gandhi) के उनका पुण्यतिथि पर तोड़ दिहल गइल. एकरा के लेके खालिस्तानी समर्थक (Khalistan Supporter) खुशी मनावत रहन लोग. लेकिन आखिर एह तोड़-फोड़ से का हासिल होई?

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 5, 2021, 11:40 AM IST

अभी पिछले साल सयुक्त राष्ट्र संघ (United Nation) सहित पूरा दुनिया में सत्य आ अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के 150वीं जयंती मनावल गईल. ई विडम्बना देखी कि एह साल जब गांधीजी के 73वां पुण्यतिथि मनावल जात रहे ठीक ओही दिने अमरीका के कैलिफोर्निया पार्क में लागल गांधीजी के मूर्ति (Statue of Gandhiji) तोड़त बा लोग. ओह अमरीका में जहाँ से हर साल धार्मिक सहिष्णुता के स्थिति के बारे में पाठ पढ़ावल जाला. अभी हाले में लोकतंत्र के मंदिर में घुस के ट्रम्प के समर्थक लोग कइसन हुड़दंग मचवले रहे, ओकर नजारा भी पूरा दुनिया देखल.

अभी कोरोना काल में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड के साथ उहा के पुलिस कइसे सरेआम हत्या कइलस ओकर परतोख सामनहीं बा.एह घटना के पूरी दुनिया के रंगभेद विरोधी, मानवाधिकारवादी लोग निंदा कइल.पूरा दुनिया में अमेरिका के थू थू भइल. ओहि क्रम में गांधीजी के ई मूर्ति तोड़ला के घटना भी देखल जाइ. काहे कि एक खास अवसर पर ई घटना भइल बा. कैलिफोर्निया में खालिस्तान समर्थक एगो संगठन एह घटना पर खुशी जाहिर कइले बा. अमेरिका में अइसन घटना कवनों पहिला बार नइखे होत. एकरा पहिले भी खालिस्तान समर्थक एगो गुट वाशिंगटन डी सी में भारतीय दूतावास के सामने लागल मूर्ति के अपमान कर चुकल बा. अइसन घटना के लेकर कबो कबो लागेला कि जइसे गांव में गरीब घर के भउजाई, सबके लुगाई लागेली. उहे हाल गांधीजी के मरे के कुछ दिन पहिले आ अभी हाल में देश दुनिया में में हो गइल बा.

गांधी जी के मूर्ति के संगे बरतल जा रहल व्यवहार के देख सुनी के अइसने लागेला. अइसन लोगन के समझे के चाहीं कि गांधीजी के देह हत्या से आ मूर्ति तोड़ला से गांधीवादी चेतना के ना मिटावल जा सकें. दुनिया में कहीं भी रंग भेद, अन्याय अत्याचार, गैर बराबरी भ्र्ष्टाचार के खिलाफ कवनों अहिंसक आन्दोलन होई,ओकर नाम चाहें जवन होखे,कहाई उ गांधीवादी चेतना से पैदा भइल आन्दोलन. अइसन आंदोलन खुद अमरीका में भइल बा. चाहे रोजा पार्क के संगे अशेव्त भइला के वजह से बस में बरतल गईल भेदभाव से पैदा भइल आंदोलन या मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व में पैदा भइल आंदोलन. मार्टिन लूथर किंग खुद के गांधीजी के ही अनुयायी बतावत रहलन. एगो जुलूस के नेतृत्व करत उनकर हत्या भइल रहे.

पर आज भी अमरीका में जब भी अशेवतन के संगे कवनों किसिम के जोर जुलुम होला, तब उहें चेतना जागृत होके सड़क पर आ जाला अपना हक़ के लड़ाई लड़े.एह घटना के बाद एगो अउर प्रसंग याद कइल जा सकेला, जवना के वर्णन वीरेंद्र कुमार बरनवाल जी अपना किताब जिन्ना, एक पुनरदृष्टि में कइले बानी. जब गांधीजी के वैचारिक रूप से घोर विरोधी मुहम्मद अली जिन्ना सिंध हाईकोर्ट के सामने गोल पार्क में सन् 1931 में स्थापित गांधीजी की सुंदर कांस्य प्रतिमा के सांप्रदायिक दंगाइयन से बचवलन. भइल ई कि जनवरी 1948 में देश विभाजन के समय उत्तर भारत से बड़ी संख्या में शरणार्थी कराची पहुंच गइले.तब कराची समेत पूरा सिंध में हिन्दू के खिलाफ दंगा शुरू हो गइल. हिन्दू खासकर कराची छोड़कर हिदुस्तान की ओर भागे लगलन.अइसने आपाधापी में मुहम्मद अली जिन्ना अपना सचिव एस एम यूसुफ के साथे गांधीजी के मूर्ति के पास से गुजरत रहलन. मुहम्मद अली जिन्ना के लागल कि दंगाई गांधीजी के मूर्ति के नुकसान पहुंचा सकेलन. जिन्ना अपना सचिव यूसुफ के निर्देश दिहलन कि जब तक स्थिति सामान्य ना हो जाय, तबतक गांधीजी के मूर्ति के उहां से हटवा के सुरक्षित स्थान पर रखवा दिह. यहां ई कहल जा सकेला कि लगभग ढाई दशक तक गांधी जी के घोर विरोधी जिन्ना के मन में गांधी जी के प्रति खाली गुजराती भइला के वजह से अइसन उदार भावना ना रहे. जिन्ना इहो जानत रहलन कि गांधीजी के वजह से ही भारत में मुसलमान सुरक्षित रहीं सकेलन. गांधीजी के मूर्ति उघोगपति जमशेद नवशेरवानजी के पास राखल गईल. अब उहे मूर्ति इस्लामाबाद स्थिति भारतीय उच्चायोग के परिसर में विराजजमान बा.

कहे के मतलब ई कि गांधीजी यूरोपीय जातीय चेतना में बसल रेसियल सुपिरियारिटी के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका में लडाई लड़ले आ जीत के भारत आके देश के आजाद करवालें. ओह चेतना से प्रेरणा लेकर ही नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद से मुक्त करवालें. जबकि अमरीका में रेसियल सुपिरियारिटी आ रेसियल डीजायरबिलि के चेतना रहीं रहीं छलके लागेला. अभी हाल के चुनाव में एतना वोट मिलल एह बात के गवाही बा.अब अमेरिकी लोगन के तय करके बा कि अइसना में उदार लोकतंत्र आ सर्वसमावेशी समाज के दावा कहाँ तक सच बा, आ गांधीजी के प्रतिमा के अपमान करिके का हासिल होइ. (मोहन सिंह लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं , ये उनके निजी विचार है.)




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