Chamoli Glacier Burst: 110 किलोमीटर बहकर पूर्वजों के घाट पर जा पहुंचा पुलिसकर्मी का शव– News18 Hindi

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चमोली. उत्तराखंड स्थित चमोली (Chamoli Disaster) में आई आपदा में राज्य पुलिस में हेड कास्टेबल के पद पर कार्यरत 42 वर्षीय मनोज चौधरी भी लापता हो गए थे. एक दिन बाद यानी सोमवार को उनका शव घटनास्थल से 110 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग स्थित अलकनंदा और पिंडार नदियों के घाट पर मिला.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मनोज के बड़े भाई ने कहा, ‘इत्तफाक है, मगर यह तो ऊपर वाले की कृपा रही कि उनकी बॉडी अपने पूर्वजों के घाट पर पहुंच कर रुक गई. यह घाट हमारे पूर्वजों के गांव कनौडी के करीब है. ऋषि गंगा नदी धौली गंगा से मिलती है, जो आगे जाकर अलकनंदा में गिरती है.

20 साल पहले पुलिस में हुए थे शामिल

लगभग 20 साल पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हुए चौधरी ने उत्तराखंड के अलग राज्य बनने पर पहाड़ी में रहने का विकल्प चुना. मध्य जनवरी तक, वह गोपेश्वर में पुलिस लाइंस में थे. बाढ़ से केवल 15 दिन पहले ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट पर तैनात थे.

चौधरी के भाई अनिल ने कहा कि ‘मुझे पुलिस से फोन आया कि मुझे सूचना मिली कि मनोज और एक अन्य पुलिसकर्मी ऋषि गंगा स्थल से गायब हैं. मैं मौके पर पहुंचा और उनके सहयोगियों ने मुझे बताया कि बाढ़ का पानी उन्हें अपने साथ दूर तक ले गया. मैं घर लौट रहा था तब मुझे कर्णप्रयाग में बरामद चार शवों की तस्वीरें मिलीं. मनोज उनमें से एक था. उम्मीद है कि भाभी सीमा को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलेगी.’

साथी पुलिसवालों ने क्या बताया?

हादसे में मारे गए चौधरी और कांस्टेबल बलबीर सिंह गड़िया (58) के साथ ड्यूटी पर तैनात देहरादून के कॉन्स्टेबल सुरेश भंडारी और कॉन्स्टेबल दीपराज ने कहा, ‘दीपराज और मैं मेन गेट पर थे और मनोज और बलबीर कमरों में थे. मैंने रैणी गांव से आ रही तेज आवाज़ सुनी और कुछ ही सेकंड में, धूल का एक बादल हमारे सामने था. दीपराज और मैं सड़क की ओर भागने लगे. मैंने बलबीर और मनोज को बुलाने की कोशिश की, लेकिन वे शायद फंस गए थे.’

उत्तराखंड पुलिस के मुख्य प्रवक्ता नीलेश आनंद ने कहा कि मृतक पुलिसकर्मियों के परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा. बता दें भीषण आपदा में मारे गए दोनों पुलिसकर्मियों, हेड कान्स्टेबल मनोज चौधरी और कांस्टेबल बलवीर सिंह गड़िया का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आपदा में मृत्यु का होना बहुत दुखद है.

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