Coronavirus: यूरोप में संक्रमण की दूसरी लहर ने बढ़ाई अन्य देशों की चिंता, भारत के लिए क्या है सबक?

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Coronavirus: संक्रमण के मामलों में एक बार फिर बढ़ोतरी को विशेषज्ञों ने कोरोना की दूसरी लहर करार दिया है. उनका कहना है कि बढ़ती सर्दी कोरोना वायरस फैलाने के खतरे को दोगुना कर देती है. कई देशों में मार्च-अप्रैल के दौरान कोरोना वायरस की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर ज्यादा खराब है.

 

भारत को यूरोप से क्या सीखना चाहिए?

 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 31 मार्च को फ्रांस में संक्रमण के रोजाना नए मामले 7 हजार 500 को पहुंच गए थे. मगर, 10 अक्टूबर को पिछले 24 घंटे में 26 हजार 675 नए मामले दर्ज किए. स्पेन में कोरोना वायरस संक्रमण के 71 हजार से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 1800 लोगों की जान चली गई है जबकि नए संक्रमण के मामले प्रतिदिन हाल में एक हजार के करीब दर्ज किए जा रहे हैं. यूरोप के कुछ देशों में लॉकडाउन और कोविड-19 के सख्त नियमों ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है. भारत के लिए भी नसीहत सीखने का मौका हो सकता है.

 

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कोविड-19 को लेकर त्योहारी मौसम और सर्दी के दौरान लोगों से उचित व्यवहार बरतने को कहा था. उन्होंने भारत में संक्रमण के नए मामलों की संख्या में गिरावट के बावजूद शालीनता के खिलाफ चेताया था और महामारी की रोकथाम के लिए प्रयास जारी रखने का आह्वान किया था. उन्होंने संक्रमण की दर में कमी को स्वीकार करते हुए सर्दी के मौसम में कोरोना की दूसरी लहर की आशंका से इंकार नहीं किया था.

 

कोरोना की दूसरी लहर से इंकार नहीं

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या विश्वनाथन ने दावा किया था कि संक्रमण की दूसरी लहर बहुत जोखिम वाली हो सकती है क्योंकि वायरस अभी भी समुदाय में मौजूद है. हमें नहीं पता कि क्या ये दूसरी लहर, दूसरा पीक या कुछ देशों में निरंगतर पहली लहर होगी. अनुमान भले हमें संभावित संक्रमण की दूसरी लहर के खिलाफ सचेत कर रहे हों, मगर हमें चौकन्ना रहते हुए सुरक्षात्मक उपाय का पालन करते रहना चाहिए.

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