MP By-election: सुरखी में भाजपा के गोविंद राजपूत ने कांग्रेस की पारुल को हराया

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सुरखी विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में एकबार फिर से गोविंद सिंह राजपूत जीत गए हैं

जहां एक ओर सुरखी विधानसभा सीट (Surakhi constituency) पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस से भाजपा में आए उम्मीदवार (BJP Candidate) गोविंद सिंह राजपूत थे, वहीं 2018 के चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ीं पारुल साहू (Parul Sahu) कांग्रेस से मैदान में थीं. दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन जीत गोविंद सिंह (Govind Singh Rajput) को मिली.

 

    • Last Updated:
      November 10, 2020, 7:59 PM IST

सागर. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar District) के सुरखी विधानसभा सीट (Surakhi constituency) के लिए हुए उपचुनाव (By-Election) में एकबार फिर से गोविंद सिंह राजपूत जीत गए हैं. साल 2018 में जहां वे कांग्रेस (Congress) के टिकट से विधानसभा पहुंचे थे, वहीं इस चुनाव में भाजपा की तरफ से जीत हासिल की है. जहां एक ओर इस सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस से भाजपा में आए उम्मीदवार (BJP Candidate) गोविंद सिंह राजपूत थे, वहीं 2018 के चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ीं पारुल साहू (Parul Sahu) कांग्रेस से मैदान में थीं. दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन जीत गोविंद सिंह (Govind Singh Rajput) को मिली. ऐसे में आइए जानते हैं 2.05 लाख मतदाताओं वाले सुरखी सीट पर क्या रही गोविंद सिंह राजपूत के जीत की 3 प्रमुख वजह….

1. भाजपा प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत के जीत की सबसे पहली वजह यहां पर कांग्रेस का कमजोर होना रहा. अगर कांग्रेस का संगठन यहां मजबूत होता तो परिणाम कुछ और हो सकते थे. गोविंद सिंह जब तक कांग्रेस में थे तो कार्यकर्ता भी उनके साथ थे, और गोविंद के भाजपा में शामिल होते ही कार्यकर्ता भी इधर-उधर हो गए और संगठन कमजोर हुआ. इसका परिणाम पारुल साहू को हार के रुप में चुकाना पड़ा.

2. पारुल साहू यहां के लिए काफी नामी चेहरा हैं. विधायक रहते हुए काम भी करवाए. लेकिन कांग्रेस नेताओं के साथ उनका सामंजस्य नहीं बैठा. ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी में होते हुए भी ज्यादातर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का झुकाव गोविंद सिंह राजपूत की ओर था. ऐसे में पारुल को अंदरखाने से कोई सपोर्ट नहीं मिला. इसका सीधा प्रभाव गोविंद सिंह की जीत हुई.

3. भाजपा में शामिल होते ही गोविंद सिंह राजपूत ने क्षेत्र के लिए ढाई सौ करोड़ का सौगात दिया, जिसमें स्कूल, सामुदायिक भवन, नल-जल जैसी योजनाएं शामिल हैं. बता दें कि क्षेत्र में पानी की बहुत किल्लत होती है. ऐसे में यह एक बड़ा मुद्दा रहा है. इन परियोजनाओं का लोकार्पण भी हो चुका है. इसकी वजह से उनकी जीत सुनिश्चित हुई.

 

 

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