Tractor Rally Violence: दिल्ली में कल कब, कैसे और कहां-कहां भड़की हिंसा- 10 प्वाइंट्स में जानें सबकुछ

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सिखों ने ऐतिहासिक लाल किला स्मारक के एक मीनार पर सिख धार्मिक झंडा फहराया (AP Photo/Dinesh Joshi)

Tractor Rally Violence: संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को किसानों की ट्रैक्टर परेड को रोक दिया है और इसमें शामिल व्यक्तियों से तुरंत अपने विरोध स्थलों पर वापस जाने की अपील की.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 27, 2021, 8:27 AM IST

नई दिल्ली.  72वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को राजपथ और लालकिले पर दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें देखने को मिली. राजपथ पर जहां एक ओर भारतीयों ने गणतंत्र दिवस पर देश की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन देखा. वहीं प्रदर्शनकारी किसान ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally Violence) के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर मुगलकालीन लाल किला पहुंच गए थे.

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर झड़पें हुईं जिससे अराजकता की स्थिति उत्पन्न हुई. इस दौरान पूरे दिन हिंसा हुई. इस दौरान घायल होने वाले किसानों की वास्तविक संख्या की जानकारी नहीं है लेकिन दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उनके 86 कर्मी घायल हो गए. इनमें से 41 पुलिसकर्मी लाल किले पर घायल हुए.

आइए हम आपको बताते हैं कि दिल्ली में कब-कब हिंसा भड़की और कैसे क्या हुआ.

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया. इस बैठक में केन्द्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, दिल्ली पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया. माना जा रहा है कि शाह ने दिल्ली पुलिस को हिंसा में शामिल व्यक्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

दिल्ली पुलिस ने एक निश्चित रूट और समय के साथ रैली की अनुमति दी थी. लेकिन किसान मजदूर संघर्ष समिति ने रूट पर चलने से इनकार कर दिया. सुबह 8 बजे तक हजारों लोग पैदल चलकर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे. कई वीडियो सामने आए जिसमें किसान सिंघू सीमा पर बैरिकेड्स तोड़ते हुए दिखे. बता दें दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर को किसानों का आंदोलन शुरू हुआ.

ITO के पास स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के करीब हिंसा शुरू हो गई. पुलिस ने कहा कि पुरानी दिल्ली की ओर जा रहे एक किसान की ट्रैक्टर पलटने के चलते मौत हो गई. वहीं अक्षरधाम में एक बस में तोड़फोड़ की गई, जहां पुलिस प्रदर्शनकारियों से भिड़ गई. झड़प की दूसरी जगह नांगलोई था, जहां पुलिस ने आंसूगैस के गोले दागे. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था.

लाल किले के वीडियो में देखा गया कि किसानों को सिखों के पवित्र ध्वज को फहराते हुए देखा गया. किले के गुंबदों पर भी झंडे फहराने के बार-बार प्रयास किए गए. मौके पर मौजूद हजारों लोग राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए, किले के बड़े दरवाजे पर खड़े थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को किले के अंदर से बाहर निकालने में कामयाबी पा ली है लेकिन कई किसान अभी भी किले के बाहर रामलीला मैदान में हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसानों में से एक ने कहा कि ‘हम मोदी सरकार को एक संदेश देने के लिए यहां आए थे, हमारा काम पूरा हो गया है. हम अब वापस जाएंगे.’ एक अन्य किसान ने कहा, ‘हम किले तक पहुंचने में कामयाब रहे, हालांकि उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की. हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाते. सरकार को यह तीनों कानून वापस लेने ही होंगे.’

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के मामले में सात प्राथमिकी दर्ज की . अधिकारियों ने यहां इसकी जानकारी दी. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘पूर्वी जिले में तीन प्राथमिकी दर्ज की गयी है . द्वारका में तीन तथा शाहदरा जिले में एक मामला दर्ज किया गया है.’ उन्होंने बताया कि और प्राथमिकी दर्ज होने के आसार हैं .

संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को किसानों द्वारा निकाली गयी ट्रैक्टर परेड को रोक दिया है और भागीदारों से अपने-अपने प्रदर्शन स्थलों की और लौटने की अपील की है. केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की ट्रैक्टर परेड तय समय से बहुत पहले शुरू हो गयी थी और राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों पर पुलिस के साथ उनका टकराव भी हुआ.

अदालती लड़ाई के बाद किसानों को रैली करने की अनुमति दी गई थी. पुलिस ने सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमाओं के पास 60 से अधिक किलोमीटर की रैली सुबह 11.30 बजे समाप्त होने के बाद ही में रैली शुरू करने को कहा था.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रैली का विरोध करते हुए कहा था कि जिस समय इस रैली करने की मांग की गई थी वह ‘राष्ट्र के लिए शर्मिंदगी’ बन जाएगा. लेकिन अदालत, ने रैली की अनुमति देने या नहीं देने का जिम्मा दिल्ली पुलिस को सौंप दिया.

किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता के बावजूद कृषि कानूनों पर कोई सहमति नहीं बन पाई है. किसानों ने 18 महीने तक कानून को सस्पेंड करने के केंद्र सरकार की अंतिम पेशकश ठुकरा दी.




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