UP के ऊर्जा मंत्री का राहुल गांधी पर तंज, बोले- कांग्रेस डूबता जहाज, जिसने की सवारी उसका हुआ बुरा हश्र

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कांग्रेस के डूबते जहाज की जिन-जिन लोगों ने सवारी की है, उनका हश्र बहुत बुरा हुआ है: श्रीकांत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के बयान के बाद पार्टी में घमासान मचा हुआ है. इस बीच, यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा (Energy Minister Shrikant Sharma) ने कांग्रेस को देश की जनता पर बोझ करार दिया है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 23, 2020, 5:33 PM IST

लखनऊ. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने हाल ही में कहा कि कांग्रेस के नेता आम लोगों से पूरी तरह से कटे हुए हैं और पार्टी में ‘पांच सितारा संस्कृति’ घर कर गई है. इसके साथ उन्होंने संगठनात्मक ढांचे में आमूल चूल परिवर्तन का आह्वान किया है. उनके इस बयान के बाद कांग्रेस में जमकर बवाल मचा हुआ है, तो विरोधी दल खासकर भाजपा कांग्रेस पर लगातार हमले कर रही है.

इस बीच, उत्‍तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा (Energy Minister Shrikant Sharma) ने बड़ा हमला बोलो है. उन्‍होंने कहा कि देश की जनता को लगता है कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की कांग्रेस इस देश के ऊपर बोझ है. कांग्रेस (Congress) के डूबते जहाज की जिन-जिन लोगों ने सवारी की है, उनका हश्र बहुत बुरा हुआ है. उत्‍तर प्रदेश में अखिलेश यादव और बिहार में तेजस्वी यादव ने इस जहाज की सवारी की थी.

गुलाम नबी आजाद ने कही थी ये बात
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने रविवार को बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कहा था कि ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर तक चुनाव कराकर पार्टी के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की तत्काल जरूरत है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को कम से कम चुनावों के दौरान पांच सितारा संस्कृति को छोड़ देना चाहिए. संगठनात्मक बदलाव के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल आजाद ने कहा कि वे सुधारवादी के रूप मुद्दे उठा रहे हैं, न कि विद्रोही के रूप में. इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘जिला, ब्लॉक और राज्य स्तर पर लोगों और कांग्रेस नेताओं के बीच बहुत बड़ा फासला है. जनता से पार्टी का जुड़ाव एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि केवल चुनाव के दौरान.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को पांच सितारा संस्कृति को छोड़ देना चाहिए। कम से कम चुनावों के दौरान उन्हें इस संस्कृति से बचना चाहिए और क्षेत्र में लोगों के बीच रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रत्येक नेता को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए। केवल दिल्ली से जाना और पांच सितारा होटलों में रहना और दो-तीन दिन बाद दिल्ली लौटना पैसे की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं है. यही नहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयों में सभी पदों के लिए चुनाव कराने की वकालत की. उन्होंने कहा कि हमें पीसीसी, डीसीसी और बीसीसी को निर्वाचित करना चाहिए और इस संबंध में पार्टी के लिए एक कार्यक्रम बहुत जरूरी है.

आजाद ने कहा कि वह कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ पार्टी के हित में इन मुद्दों को उठा रहे है. उन्होंने कहा कि हम सुधारवादी हैं, विद्रोही नहीं. हम नेतृत्व के खिलाफ नहीं हैं बल्कि हम सुधारों का प्रस्ताव देकर नेतृत्व के हाथ मजबूत कर रहे हैं. वहीं, आजाद ने चुनाव में हार के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार नहीं ठहराया बल्कि नेताओं और लोगों के बीच संपर्क नहीं होने की बात कही. उन्होंने बिहार की हार पर विस्तार से कुछ नहीं कहा. आजाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने प्रमुख पदों पर चुनावों और पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अगस्त में पत्र लिखा था.





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