UP Panchayat Chunav: जानिए वोटिंग के समय किस बात का रखना होगा खास ध्यान, नहीं तो हो सकता है अफसोस– News18 Hindi

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कानपुर. उत्तर प्रदेश में 2015 के मुकाबले इस बार होने जा रहे पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election 2021) की प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं. इस बार सभी 4 पदों के लिए एक साथ वोटिंग (Voting) होगी. 2015 में दो-दो पदों के लिए अलग-अलग वोटिंग हुई थी. इस बार बदले नियम से आम जनता को बहुत सावधान रहने की जरूरत है. उन्हें देखना होगा कि कहीं जरा सी चूक न हो जाए, नहीं तो पोलिंग बूथ से निकलने के बाद उन्हें के हाथ अफसोस ही लगेगा.

दरअसल इस बार वोटिंग के समय मतदाता को एक साथ 4 बैलेट पेपर मिलेंगे. यानी चार उम्मीद्वारों के या तो चुनाव चिन्ह याद रखने होंगे या फिर उनके नाम. लेकिन ये कोई आसान काम नहीं है क्योंकि पंचायत के चुनाव में चुनाव चिन्ह भी बिल्कुल नए होते हैं. आमतौर पर लोगों को पार्टियों के चुनाव चिन्ह याद रहते हैं लेकिन, पंचायत के इलेक्शन में ये चुनाव चिन्ह किसी को नहीं दिये जाते. इस चुनाव में फ्री सिम्बल मिलते हैं.

पोलिंग बूथ में वोटर को मिलेंगे 4 बैलेट पेपर

इस बार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के लिए एक साथ वोटिंग होगी. इन सभी पदों के लिए वोटर को चार बैलेट पेपर दिये जायेंगे. ऐसे में उन्हें चारों के सिम्बल या नाम याद रखने होंगे. पिछली बार 2015 में दो बार में चारों पदों के चुनाव हुए थे. पहली बार में ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव हुए थे और उसके बाद क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव हुए थे. इससे थोड़ी आसानी थी क्योंकि एक बार में दो ही उम्मीद्वारों को वोट देने पड़े थे. लेकिन इस बार चार-चार उम्मीद्वारों को एक बार में वोट देने होंगे.

नाम और चुनाव निशान याद न होने पर कुछ लोग करते हैं ये जुगाड़

बहुत से लोग तो वोट देते समय हाथ पर चुनाव चिन्ह लिखकर ले जाया करते हैं, जिससे उन्हें याद रहे कि वोट किसे देना है? आम तौर पर इस चुनाव में ग्राम प्रधान का सिम्बल तो सभी को याद रहता है लेकिन, बाकी तीन पदों के लिए बहुत कम ही लोग संजीदगी से वोट देते हैं.

फ्री सिम्बल बढ़ाएंगे मुश्किलें

बता दें कि पंचायत चुनावों में उम्मीद्वारों को फ्री सिम्बल दिये जाते हैं. यानी उन्हें ऐसे चिन्ह दिये जाते हैं, जो किसी पार्टी को एलॉट नहीं होते हैं. ये हर चुनाव में बदलते रहते हैं. विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में तो एक ही चुनाव चिन्ह साल-दर-साल कायम रहते हैं लेकिन, पंचायत चुनाव में ऐसा नहीं होता. ऐसे में वोट देने जाने से पहले वोटरों को अच्छे से रट्टा मारना होगा कि किस निशान पर उन्हें वोट देना है. नहीं तो कोई और पसंदीदा उम्मीद्वार होगा और वोट दे आयेंगे किसी और को.

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